ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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जयशंकर का बयान जो पाकिस्तान को चुभ गया
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट के दौरान पाकिस्तान की सेना पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की कई मुश्किलों की जड़ उसकी सेना ही है, जो आतंकवादी गुटों को मदद देती है। जयशंकर ने यह भी जोड़ा कि दुनिया में अच्छे-बुरे आतंकवादी होते हैं, वैसे ही अच्छे-बुरे सैन्य नेता भी। सबका इशारा पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तरफ लगा।
यह बयान सुनते ही पाकिस्तान में हंगामा मच गया। रविवार को उनके विदेश मंत्रालय ने इसे भड़काऊ, गलत और गैर-जिम्मेदार बताया। पाक प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि वे इस टिप्पणी को खारिज करते हैं और निंदा भी करते हैं। पाकिस्तान खुद को जिम्मेदार देश बताते हुए बोला कि उनकी सेना देश की सुरक्षा का मजबूत पहाड़ है।
पाकिस्तान का गुस्सा: भारत पर बदनामी का आरोप
ताहिर अंद्राबी ने भारत पर सीधा इल्जाम लगाया कि वो पाक के नेताओं और संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना था कि पाकिस्तान की सेना पर कोई सवाल नहीं उठ सकता। अंद्राबी ने मई के उस संघर्ष का जिक्र किया, जब पाक सेना ने कथित तौर पर भारत के हमले का 'प्रभावी, अनुशासित और जिम्मेदार' जवाब दिया। इसे उन्होंने अपनी ताकत का सबूत बताया।
लेकिन हकीकत में वह मई का ऑपरेशन सिंदूर ही था, जहां भारत ने पाक और PoK में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। पाकिस्तान इसे गीदड़भभकी की तरह पेश कर रहा है, जबकि नुकसान उनका ही हुआ था। जयशंकर का बयान साफ तौर पर पाक की कमजोर नस दबाने वाला था।
ऑपरेशन सिंदूर: पाक को जो चोट लगी, वो भूला नहीं
यह विवाद ठीक उस वक्त भड़का जब ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा फिर से गरम है। 7 मई 2025 को शुरू हुआ यह ऑपरेशन पहलगाम हमले के जवाब में था, जिसमें 26 बेगुनाह लोग मारे गए थे। भारत ने चार दिनों तक पाकिस्तान और PoK के आतंकी ढांचे को टारगेट किया। 10 मई को दोनों तरफ से सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी।
भारतीय एयर फोर्स चीफ एपी सिंह के मुताबिक, इस दौरान पाक के कम से कम 12 मिलिट्री प्लेन तबाह या खराब हुए, जिनमें कई F-16 भी शामिल थे। पाकिस्तान ने इसे छिपाने की पूरी कोशिश की, लेकिन दुनिया को पता चल गया। जयशंकर का बयान इसी घाव पर नमक छिड़कने जैसा था। पाकिस्तान अब भी उसी पुरानी धुन पर नाच रहा है।
जयशंकर ने क्यों चुना यह मंच?
हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट जैसे बड़े मंच पर जयशंकर ने पाकिस्तान को आइना दिखाया। उनका कहना था कि पाक की सेना आतंक को पालती है, और यही उनकी परेशानियों का सबब है। अच्छे-बुरे सैन्य नेताओं वाली बात ने आसिम मुनीर को निशाने पर ले लिया। पाकिस्तान में आर्मी का दखल हमेशा से ज्यादा रहा है, और जयशंकर ने ठीक इसी पर चोट की।
पाकिस्तान की तरफ से जवाब आया कि वे जिम्मेदार राष्ट्र हैं। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर जैसे सबूत उनके दावों को झूठा साबित करते हैं। भारत ने आतंक के खिलाफ साफ स्टैंड लिया, जबकि पाक हमेशा इनकार करता रहता है।
पाकिस्तान की पुरानी आदत: इनकार और धमकी
पाकिस्तान का यह रिएक्शन नया नहीं है। हर बार भारत सच बोलता है तो वे निंदा करते हैं, बदनामी का आरोप लगाते हैं। ताहिर अंद्राबी ने कहा कि उनकी सेना पर गर्व है। लेकिन मई के संघर्ष में F-16 गायब हो गए, तब गर्व कहां गया? ऑपरेशन सिंदूर ने पाक की हकीकत खोल दी।
भारत ने पहलगाम जैसे हमलों का बदला लिया, और दुनिया ने सराहा भी। पाकिस्तान अब भी वही पुराना राग अलाप रहा है – हम जिम्मेदार हैं, हमारी सेना सबसे ताकतवर। लेकिन जयशंकर ने साफ कर दिया कि आतंक को शरण देने वालों का कोई भरोसा नहीं।
भारत-पाक तनाव: पुरानी कहानी, नया मोड़
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तो पुराना है, लेकिन जयशंकर का बयान ने इसे फिर से हवा दी। पाकिस्तान शायद सोच रहा होगा कि भारत चुप रहेगा, लेकिन हमने हमेशा सच बोला है। ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि भारत अब सिर्फ बातें नहीं करता, एक्शन लेता है।
पाकिस्तान की सेना पर सवाल उठना लाजमी है, जब वो आतंक को बढ़ावा देती है। जयशंकर ने बिल्कुल सही कहा – अच्छे-बुरे नेता होते हैं। आसिम मुनीर जैसे लोग पाक को गुमराह कर रहे हैं। भारत की विदेश नीति साफ है – आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस।
दुनिया क्या देख रही है?
दुनिया भी पाकिस्तान की करतूतें जानती है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद कई देशों ने भारत का साथ दिया। पाकिस्तान का इनकार अब किसी को फंस नहीं रहा। जयशंकर का बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाक को बेनकाब करता है। उनकी सेना पर गर्व करने से पहले आतंक रोकें।
भारत मजबूती से खड़ा है। पहलगाम जैसे हमलों का जवाब देने की ताकत हममें है। पाकिस्तान को आईना दिखाना जरूरी था।
आगे क्या? पाकिस्तान सुधरेगा या नहीं
अब पाकिस्तान का अगला कदम देखना है। क्या वो आतंक पर लगाम लगाएगा, या फिर वही पुरानी धमकी? जयशंकर ने साफ संकेत दिया कि भारत चुप नहीं बैठेगा। ऑपरेशन सिंदूर की यादें ताजा हैं।
भारत शांति चाहता है, लेकिन आतंक बर्दाश्त नहीं। पाकिस्तान को समझना होगा कि सेना को आतंक का साथी बनाने से कुछ हासिल नहीं। जयशंकर का बयान एक चेतावनी है – सुधर जाओ, वरना नतीजे भुगतो।
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